Sochvimarsh Automobile Desk: दुनिया में कारें तो बहुत हैं, लेकिन जब बात ‘रॉयल स्टेटस’ और ‘अल्टीमेट लग्जरी’ की आती है, तो जुबां पर सिर्फ एक ही नाम आता है— Rolls Royce (रोल्स रॉयस)। अरबपतियों और शाही परिवारों की पहली पसंद मानी जाने वाली इस कार को महज एक वाहन नहीं, बल्कि ‘चलता-फिरता महल’ कहा जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक Rolls Royce की कीमत ₹5 करोड़ से शुरू होकर ₹30-40 करोड़ तक क्यों जाती है? आखिर इसमें ऐसा क्या है जो इसे एक आम लग्जरी कार से अलग बनाता है? आइए जानते हैं वे 5 जादुई फीचर्स जो इसे दुनिया की सबसे महंगी और खास कार बनाते हैं।
‘साइलेंट’ इंजन: शोर का नामो-निशान नहीं
रोल्स रॉयस के बारे में एक मशहूर कहावत है कि “60 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर भी कार के अंदर आपको सिर्फ अपनी घड़ी की टिक-टिक सुनाई देगी।” कंपनी अपनी कारों को इतना शांत बनाने के लिए लगभग 130 किलो ‘साउंड इंसुलेशन’ (आवाज सोखने वाला मटीरियल) का इस्तेमाल करती है। इसके टायरों में भी विशेष फोम भरा जाता है ताकि सड़क की आवाज केबिन के अंदर न आए। यही कारण है कि इसके अंदर बैठना किसी शांत महल के कमरे जैसा महसूस होता है।
‘Starlight Headliner’: कार की छत पर असली सितारे
रोल्स रॉयस का सबसे चर्चित फीचर इसकी छत है। इसे Starlight Headliner कहा जाता है। इसमें हजारों छोटे-छोटे फाइबर-ऑप्टिक केबल्स को हाथों से फिट किया जाता है, जो रात के समय कार के अंदर बैठने पर आपको खुले आसमान के नीचे होने का अहसास कराते हैं। आप अपनी पसंद के हिसाब से अपना ‘राशि चक्र’ (Constellation) भी छत पर बनवा सकते हैं। इसे तैयार करने में कारीगरों को कई दिनों का समय लगता है।
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‘The Spirit of Ecstasy’: सोने-चांदी की पहचान
कार के बोनट पर खड़ी उस छोटी सी उड़ती हुई मूर्ति को ‘स्पिरिट ऑफ एक्स्टसी’ (Spirit of Ecstasy) कहा जाता है। यह रोल्स रॉयस की पहचान है। ग्राहक इसे अपनी पसंद के अनुसार ठोस चांदी, 24-कैरेट सोने या क्रिस्टल से बनवा सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसमें एक खास तकनीक होती है—जैसे ही कोई इसे छूने या चुराने की कोशिश करता है, यह तुरंत बोनट के अंदर गायब हो जाती है।
पूरी तरह से ‘Handcrafted’ (हाथों का जादू)
आजकल ज्यादातर कारें रोबोट और मशीनों से बनती हैं, लेकिन एक रोल्स रॉयस को बनाने में मशीनों का न्यूनतम इस्तेमाल होता है। कार की बॉडी पर जो पतली रेखा (Coachline) होती है, उसे आज भी पूरी दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति (मार्क कोर्ट) अपने हाथों से ब्रश के जरिए पेंट करता है। इसमें इस्तेमाल होने वाली चमड़ी (Leather) उन बैलों की होती है जो ऊंचे पहाड़ों पर रहते हैं, ताकि उनके चमड़े पर मच्छर के काटने का कोई निशान न हो।
‘Magic Carpet Ride’ सस्पेंशन
रोल्स रॉयस को चलाते समय आपको गड्ढों का अहसास बिल्कुल नहीं होता। कंपनी इसे ‘Magic Carpet Ride’ कहती है। इसके सस्पेंशन सिस्टम में लगे कैमरे सड़क को पहले ही स्कैन कर लेते हैं और आने वाले गड्ढे के हिसाब से कार की ऊंचाई और शॉकर को पहले ही एडजस्ट कर देते हैं। इससे कार सड़क पर तैरती हुई महसूस होती है।
निष्कर्ष: कीमत नहीं, यह एक अनुभव है
रोल्स रॉयस सिर्फ एक कार नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और कला का बेहतरीन नमूना है। इसकी ऊंची कीमत का कारण इसके फीचर्स से ज्यादा वो ‘अनुकूलन’ (Customization) है जो कंपनी आपको देती है। आप अपनी कार के लिए 44,000 अलग-अलग रंगों में से चुनाव कर सकते हैं।
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अगर आप भी लग्जरी के शौकीन हैं, तो रोल्स रॉयस को समझना किसी सपने को जीने जैसा है। Sochvimarsh का मानना है कि यह कार सिर्फ अमीरी का प्रतीक नहीं, बल्कि परफेक्शन (पूर्णता) की एक मिसाल है।
फोटो क्रेडिट: @rollsroycecars (Official Instagram Account)





