भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को ‘वृंदा’ यानी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। जिस घर के आंगन में तुलसी का वास होता है, वहां नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं। लेकिन अक्सर हम एक ऐसी बड़ी भूल कर बैठते हैं, जिससे मां तुलसी ‘भारी’ महसूस करने लगती हैं।
वास्तु शास्त्र और पद्म पुराण के अनुसार, तुलसी पर उगने वाली मंझरी (बीज) का जरूरत से ज्यादा बढ़ जाना एक गंभीर दोष माना गया है। इसे समय पर न उतारना न केवल पौधे के विकास को रोकता है, बल्कि घर के मुखिया पर मानसिक और आर्थिक बोझ भी बढ़ाता है।
क्यों माना जाता है इसे ‘ब्रह्म हत्या’ जैसा भार?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को सबसे अधिक प्रिय हैं। जब तुलसी के पौधे पर मंझरी आने लगती है, तो इसका अर्थ है कि पौधा अब अपनी पूरी ऊर्जा उन बीजों को परिपक्व करने में लगा रहा है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो मंझरी आने के बाद पौधा अपनी आयु पूरी करने लगता है और धीरे-धीरे सूख जाता है।
शास्त्रों में इसे प्रतीकात्मक रूप से ‘ब्रह्म हत्या’ के भार के समान कष्टकारी बताया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जैसे एक माँ के सिर पर भारी बोझ होने से उसे असहनीय पीड़ा होती है, वैसे ही सूखी मंझरी तुलसी माता के लिए बोझ बन जाती है। यदि आप इस बोझ को समय पर नहीं उतारते, तो घर की तरक्की रुक जाती है और सुख-शांति का अभाव होने लगता है।
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मंझरी उतारने का सही समय और शुभ दिन
तुलसी की मंझरी कभी भी अपनी मर्जी से किसी भी समय नहीं उतारनी चाहिए। इसके लिए मर्यादा और नियमों का पालन करना अनिवार्य है। जब मंझरी पूरी तरह से सूख जाए और उसका रंग भूरा हो जाए, तभी उसे अलग करना चाहिए। जब तक मंझरी हरी रहती है, उसे तोड़ना वर्जित माना गया है क्योंकि उसमें जीवन का अंश होता है।
दिन का चुनाव करते समय विशेष सावधानी बरतें। रविवार, एकादशी और ग्रहण (सूर्य या चंद्र) के दिनों में भूलकर भी तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। मंझरी उतारने के लिए गुरुवार का दिन सबसे श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। मंझरी हटाते समय कभी भी नाखूनों का उपयोग न करें, बल्कि उंगलियों के पोरों से इसे बहुत ही कोमलता से अलग करें।
उतरी हुई मंझरी: कंगाली मिटाने का गुप्त उपाय
उतरी हुई इन मंझरियों को कभी भी कचरे में फेंकने की गलती न करें, यह मां तुलसी का घोर अपमान माना जाता है। शास्त्रों में इसके कुछ ऐसे अचूक प्रयोग बताए गए हैं जो आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकते हैं:
भगवान विष्णु को अर्पण: सूखी मंझरी को भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल के चरणों में अर्पित कर दें। मान्यता है कि प्रभु को तुलसी के पत्तों से भी हजार गुना ज्यादा उसकी मंझरी प्रिय है। इससे पितृ दोष शांत होते हैं।
तिजोरी के लिए महाउपाय: शुक्रवार के दिन तुलसी की कुछ सूखी मंझरियों को लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। वास्तु शास्त्र कहता है कि यह रुकी हुई लक्ष्मी को घर की ओर आकर्षित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
नकारात्मकता का नाश: तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें थोड़ी सी मंझरी डाल दें। इस जल का पूरे घर में छिड़काव करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
निष्कर्ष
तुलसी की सेवा का अर्थ केवल उसे जल देना नहीं, बल्कि उसे एक संतान की तरह प्रेम देना और उसे कष्ट मुक्त रखना भी है। जैसे ही आप तुलसी से सूखी मंझरी हटाते हैं, पौधा फिर से नई पत्तियां निकालने लगता है और हरा-भरा हो जाता है। यह हरियाये भी ली साक्षात मां लक्ष्मी के प्रसन्न होने का संकेत है।
Soch Vimarsh का यह प्रयास आपको इसी प्राचीन और सच्चे विज्ञान से जोड़ना है ताकि आपके जीवन में सुख, शांति और अपार धन का वास हो सके।





