उज्जैन: महाशिवरात्रि केवल एक व्रत या त्योहार नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की उस दिव्य ऊर्जा के मिलन की रात है जब स्वयं महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शास्त्रों में कहा गया है कि साल की इस सबसे काली रात में एक ऐसा ‘जादुई’ समय आता है, जिसे ‘निशिता काल’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इसी समय शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था और इसी समय महादेव पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं।
अगर आप अपनी जिंदगी की बड़ी से बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं, चाहे वह धन की कमी हो, बीमारी हो या मानसिक अशांति—तो महाशिवरात्रि की रात का वह खास ‘आधी रात का मुहूर्त’ आपकी तकदीर बदल सकता है। आइए जानते हैं निशिता काल का वो रहस्यमयी मंत्र जो आपकी हर पुकार महादेव तक पहुँचा सकता है।
आखिर क्या है ‘निशिता काल’ और क्यों है यह इतना खास?
हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बांटा गया है, लेकिन इनमें सबसे शक्तिशाली समय ‘आठवां मुहूर्त’ यानी निशिता काल माना जाता है। यह समय रात के ठीक 12 बजे के आसपास शुरू होता है। शिव पुराण के अनुसार, निशिता काल वह क्षण है जब आध्यात्मिक शक्तियां अपने चरम पर होती हैं।
ऋषि-मुनियों का मानना है कि जो भक्त इस समय जागकर महादेव की आराधना करता है, उसे पूरे साल की पूजा का फल मात्र उस एक घंटे में मिल जाता है। इस समय की गई प्रार्थना सीधे ‘कैलाश’ तक पहुँचती है क्योंकि इस समय प्रकृति पूरी तरह शांत होती है और मनुष्य की एकाग्रता सबसे अधिक होती है।
ये भी पढ़ें: महाशिवरात्रि 2026 पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, केवल एक लोटा जल चढ़ाते समय बोल दें यह गुप्त मंत्र और चमक जाएगी किस्मत
आधी रात का वो गुप्त मंत्र: जो खोल देगा किस्मत के द्वार
निशिता काल की पूजा में किसी लंबे कर्मकांड की जरूरत नहीं होती, बल्कि ‘भाव’ और ‘सही मंत्र’ की शक्ति काम करती है। शास्त्रों में इस विशेष समय के लिए ‘शिव पंचाक्षरी मंत्र’ को सबसे अधिक प्रभावी बताया गया है, लेकिन इसे जपने का तरीका थोड़ा अलग है।
वो गुप्त मंत्र है: “ॐ नमः शिवाय”
सुनने में यह मंत्र सामान्य लग सकता है, लेकिन निशिता काल में इसका जाप ‘अघोर मंत्र’ के समान फल देता है। आपको रात 12 बजे शिवलिंग के सामने बैठकर या ध्यान मुद्रा में इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। यदि आप किसी विशेष संकट में हैं, तो ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का सवा लाख बार मानसिक जाप शुरू करने के लिए यह सबसे शुभ घड़ी है।
निशिता काल पूजा की विधि: ऐसे करें महादेव को प्रसन्न
महाशिवरात्रि की रात 12 बजे जब पूरी दुनिया सो रही हो, तब आप स्नान करके साफ कपड़े पहनें। महादेव को प्रसन्न करने के लिए इन चरणों का पालन करें:
- गंगाजल और दूध: शिवलिंग पर शहद और गंगाजल मिश्रित दूध अर्पित करें।
- बिल्वपत्र का रहस्य: तीन दलों वाला बिना कटा-फटा बेलपत्र चढ़ाएं। ध्यान रहे, बेलपत्र के चिकने हिस्से पर ‘चंदन’ से ॐ जरूर लिखें।
- दीपक का दान: निशिता काल में घी का एक दीपक जरूर जलाएं। यह दीपक आपके जीवन के अंधकार को मिटाने का प्रतीक माना जाता है।
क्या सच में रात 12 बजे महादेव सुनते हैं पुकार?
पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि निशिता काल में ही भगवान शिव ने हलाहल विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी और इसी समय वे तांडव मुद्रा में ब्रह्मांड को नई ऊर्जा देते हैं। इसलिए, यह समय ‘मांगने’ का नहीं बल्कि ‘जुड़ने’ का है। जब आप निशिता काल में मंत्र जप करते हैं, तो आपकी ‘वाइब्रेशन’ ब्रह्मांड की ऊर्जा से मैच कर जाती है।
भक्तों का अनुभव है कि इस समय मांगी गई मन्नतें अक्सर चमत्कारिक रूप से पूरी होती हैं। चाहे व्यापार में घाटा हो या विवाह में देरी, महादेव की ‘निशिता काल’ की तीसरी आँख सब कुछ देख रही होती है और वे अपने भक्तों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करते।
ये भी पढ़ें: सोने से पहले मन में बोलें ये 5 शब्द और देखिए चमत्कार, कैसे रातों-रात बदल सकती है आपकी नकारात्मक सोच और किस्मत!
सावधान! इस समय भूलकर भी न करें ये काम
निशिता काल की पूजा अत्यंत पवित्र होती है, इसलिए इस दौरान मन में कोई भी नकारात्मक विचार या क्रोध न लाएं। इस समय तामसिक भोजन या नशीली चीजों का सेवन महादेव के क्रोध को आमंत्रित कर सकता है। अगर आप पूजा नहीं भी कर पा रहे हैं, तो केवल मौन रहकर मन ही मन ‘नमः शिवाय’ का जाप करें।





