Jalna Suicide Case: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद 28 वर्षीय युवक महेश आड़े (Mahesh Aade) ने अपनी जान दे दी। एक छोटी-सी गलती ने उसकी पूरी ज़िंदगी छीन ली — और अब पुलिस ने सात लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।
क्या था पूरा मामला?
कुछ दिनों पहले जालना ज़िले के परतवाड़ा तालुका के ढोकमाल गांव के रहने वाले महेश आड़े का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वह अपने दोस्त के साथ छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन (पहले औरंगाबाद) के पास पेशाब करते हुए दिखाई दे रहे थे।
वीडियो बनाने वाले कुछ युवकों ने दावा किया कि महेश ने यह जानबूझकर किया ताकि ऐतिहासिक व्यक्ति का अपमान हो। बस यहीं से शुरू हुआ ऑनलाइन ट्रोलिंग का सिलसिला।
सोशल मीडिया पर नफरत और धमकियों की बौछार
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर महेश को लगातार गालियां, मीम्स और धमकियां मिलने लगीं।
महेश और उसके दोस्त ने एक माफी वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था। उन्होंने गलती मानी और सबके सामने माफ़ी भी मांगी।
लेकिन नफ़रत वहीं नहीं रुकी।
लोगों ने उन्हें फोन पर धमकियां देना शुरू कर दीं। कुछ यूज़र्स ने उन्हें “देशद्रोही” तक कहा।
टूट गया हौसला, खत्म कर ली ज़िंदगी
महेश के परिवार के मुताबिक,
“रेलवे पुलिस जब हमारे घर आई थी, तो उसने वहीं माफी मांगी थी और एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया था। लेकिन उसके बाद भी उसे धमकियां आती रहीं। वह बहुत परेशान था और 5 नवंबर की सुबह करीब 10 बजे उसने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली।”
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महेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसने एमबीए किया था और पहले पंचायत समिति में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करता था। बाद में उसने नौकरी छोड़ दी ताकि परिवार की 10 एकड़ ज़मीन संभाल सके।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
अष्टी पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों पर केस दर्ज किया है —
उन पर भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 3(5) (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर गणेश सुरवसे ने बताया,
“हमने सात में से दो आरोपियों की पहचान कर ली है। सोशल मीडिया पर हजारों संदेश और अकाउंट हैं, हम जांच कर रहे हैं कि किसने धमकियां दीं या वीडियो बार-बार शेयर किया।”
एक छोटी सी गलती को लेकर किसी की ज़िंदगी तबाह हो जाए — क्या यही सोशल मीडिया की ताकत है?
महेश ने गलती मानी, माफी भी मांगी, लेकिन समाज ने उसे दूसरा मौका नहीं दिया।
यह घटना हमें सिखाती है कि ऑनलाइन नफरत, ट्रोलिंग और शर्मिंदा करने की संस्कृति कितनी खतरनाक हो चुकी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में उपयोग की गई सभी तस्वीरें AI द्वारा बनाई गई हैं।





