आज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में हमारा अधिकांश समय स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन के सामने बीतता है। लगातार घंटों तक स्क्रीन को देखने से हमारी आँखों की सिलियरी मांसपेशियां बहुत ज़्यादा कमज़ोर हो जाती हैं। इसके कारण बहुत ही कम उम्र में बच्चों और युवाओं की आँखों पर मोटे-मोटे चश्मे चढ़ जाते हैं। आँखों में सूखापन, पानी आना और धुंधला दिखना आजकल एक आम समस्या बन चुकी है।
लोग आँखों की रोशनी को वापस पाने के लिए कई तरह के महंगे आई ड्रॉप्स और लेज़र ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार, अगर हम अपनी सुबह की दिनचर्या में केवल दो बेहद आसान कामों को शामिल कर लें, तो आँखों की कमज़ोरी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। ये दो काम इतने असरदार हैं कि इनसे कुछ ही महीनों में आपके चश्मे का नंबर धीरे-धीरे कम होने लगेगा और आपकी देखने की क्षमता बहुत तेज़ हो जाएगी।
पहला काम: सुबह की बासी लार और तांबे के पानी का चमत्कारी प्रयोग
आयुर्वेद में सुबह उठते ही बिना कुल्ला किए मुँह की बासी लार (Saliva) को आँखों के लिए एक दिव्य औषधि माना गया है। सुबह की लार में कई ऐसे एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व और प्राकृतिक एंज़ाइम्स पाए जाते हैं जो आँखों के विकारों को दूर करते हैं। रोज सुबह उठकर अपनी उंगली की मदद से इस बासी लार को अपनी आँखों में काजल की तरह लगाएं। यह थोड़ा अजीब ज़रूर लग सकता है, लेकिन यह सदियों पुराना आजमाया हुआ नुस्खा है।
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इसके साथ ही, रात भर तांबे के बर्तन में रखे हुए पानी से सुबह अपनी आँखों पर छींटे मारें। ऐसा करने के लिए मुँह में थोड़ा सा पानी भर लें और फिर अपनी आँखों को खोलकर साफ़ पानी के 10 से 15 बार छींटे मारें। मुँह में पानी भरने से आँखों की नसें पूरी तरह फैल जाती हैं, और जब उन पर तांबे के पानी के छींटे पड़ते हैं, तो आँखों के पीछे का ब्लड सर्कुलेशन यानी रक्त संचार बहुत तेज़ हो जाता है। इससे आँखों की थकान दूर होती है और रोशनी बढ़ती है।
दूसरा काम: हरी घास पर नंगे पैर चलना और त्रिफला का नियम
दूसरा सबसे महत्वपूर्ण काम है रोज सुबह सूर्योदय के समय कम से कम 15 से 20 मिनट तक हरी घास पर नंगे पैर चलना। सुबह के समय घास पर जो ओस की बूंदें जमी होती हैं, वे हमारे पैरों के तलवों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को एक्टिवेट करती हैं। हमारे पैरों के अंगूठे और उसके पास की उंगलियों का सीधा संबंध हमारी आँखों की नसों से होता है। जब आप ओस वाली घास पर चलते हैं, तो आँखों की तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को बहुत गहरी शांति और ताकत मिलती है।
इस अभ्यास के साथ-साथ आप रात को एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को एक गिलास पानी में भिगोकर रख सकते हैं। सुबह इस पानी को एक साफ़ कपड़े से अच्छी तरह छान लें और उस पानी से अपनी आँखों को धोएं। त्रिफला में मौजूद आंवला, बहेड़ा और हरड़ आँखों के लेंस को साफ़ रखने और मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्याओं से बचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह दोनों काम मिलकर आपकी आँखों को अंदर से नया जीवन प्रदान करते हैं।
खान-पान में करें ये छोटा सा बदलाव
इन दो सुबह के कामों के साथ-साथ अगर आप अपनी डाइट में थोड़ा सा सुधार कर लें, तो चश्मा बहुत जल्दी उतर सकता है। अपनी रोज़ की डाइट में विटामिन-ए (Vitamin A) से भरपूर चीजें जैसे गाजर, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियां और भीगे हुए बादाम शामिल करें। रात को सोने से पहले पैर के तलवों में गाय के शुद्ध घी या सरसों के तेल से मालिश करना भी आँखों की रोशनी के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
यह पूरी तरह से एक सुरक्षित, सच्चा और प्राकृतिक उपाय है जिसका शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। अगर आप पूरे विश्वास के साथ लगातार दो से तीन महीने तक इन नियमों का पालन करते हैं, तो आपकी आँखों का धुंधलापन पूरी तरह गायब हो जाएगा। महंगी दवाओं और डॉक्टरों के चक्कर काटने के बजाय इस प्राचीन भारतीय तरीके को अपनाकर आप अपनी आँखों की सेहत को हमेशा के लिए बेहतर बना सकते हैं।





