हम में से ज़्यादातर लोग पानी पीने को लेकर दो हिस्सों में बंटे हुए हैं। कुछ लोग दिनभर बोतल हाथ में लेकर चलते रहते हैं और कुछ ऐसे हैं जो प्यास लगने पर ही पानी पीते हैं। आम सलाह यही सुनाई देती है कि “दिन में 8–10 गिलास पानी ज़रूर पीना चाहिए”, लेकिन क्या यह नियम हर उम्र, हर शरीर और हर स्थिति पर लागू होता है? यहीं से असली सवाल शुरू होता है।
पानी शरीर के लिए ज़रूरी है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन जरूरत से ज्यादा या जरूरत से कम पानी पीना, दोनों ही स्थितियां शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकती हैं। खास बात यह है कि पानी की सही मात्रा उम्र के साथ बदलती रहती है, जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
क्या सभी को बराबर मात्रा में पानी पीना चाहिए?
यह मान लेना कि हर इंसान को एक जैसी मात्रा में पानी चाहिए, सबसे बड़ी गलती है। शरीर की बनावट, उम्र, काम करने का तरीका, मौसम और स्वास्थ्य — ये सभी मिलकर तय करते हैं कि आपको रोज कितना पानी चाहिए।
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एक बच्चे, एक युवा और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति के शरीर की ज़रूरतें अलग होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर का वाटर बैलेंस बदलने लगता है, प्यास का संकेत भी कमजोर पड़ सकता है। यही वजह है कि सही मात्रा जानना बेहद जरूरी हो जाता है।
18 से 30 साल की उम्र में पानी की सही जरूरत
इस उम्र में शरीर सबसे ज्यादा एक्टिव होता है। मेटाबॉलिज्म तेज रहता है, पसीना ज्यादा निकलता है और शारीरिक गतिविधियां भी अधिक होती हैं। ऐसे में पानी की जरूरत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
अगर आपकी उम्र 18 से 30 साल के बीच है और आप सामान्य एक्टिव लाइफ जीते हैं, तो औसतन 2.5 से 3.5 लीटर पानी शरीर के लिए पर्याप्त माना जाता है। लेकिन यह मात्रा तब बढ़ सकती है जब आप ज्यादा चलते-फिरते हैं, वर्कआउट करते हैं या बहुत पसीना आता है।
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इस उम्र में सबसे जरूरी बात यह होती है कि पानी को दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पिया जाए, एक साथ बहुत ज्यादा नहीं।
30 से 45 साल के बीच पानी पीने का सही तरीका
यह वह उम्र होती है जब जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, तनाव बढ़ता है और शरीर धीरे-धीरे बदलाव दिखाने लगता है। इसी उम्र में लोग पानी कम पीने की आदत भी बना लेते हैं, जिसका असर सीधा स्किन, पाचन और थकान पर दिखता है।
30 से 45 साल के लोगों के लिए 2 से 3 लीटर पानी आमतौर पर सही माना जाता है। लेकिन इस उम्र में सिर्फ मात्रा नहीं, बल्कि पानी पीने का समय ज्यादा अहम हो जाता है।
सुबह उठते ही, खाने से पहले और दिन के बीच-बीच में पानी पीना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। रात को बहुत ज्यादा पानी पीना इस उम्र में नींद को प्रभावित कर सकता है।
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45 से 60 साल की उम्र में क्यों बदल जाती है जरूरत
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की मांसपेशियों में पानी की मात्रा कम होने लगती है। साथ ही प्यास लगने का एहसास भी कमजोर हो सकता है। यही वजह है कि कई लोग बिना महसूस किए डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।
45 से 60 साल की उम्र में आमतौर पर 1.8 से 2.5 लीटर पानी काफी माना जाता है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पानी कम नहीं होना चाहिए, बल्कि जरूरत से ज्यादा भी नहीं।
अगर इस उम्र में दिल, किडनी या ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या है, तो पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह से तय करना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
60 साल के बाद पानी पीने में क्यों चाहिए ज्यादा सावधानी
बुज़ुर्गों में पानी की कमी सबसे जल्दी असर दिखाती है — चक्कर, कमजोरी, कब्ज और भ्रम की स्थिति तक बन सकती है। लेकिन यही उम्र ऐसी भी होती है जहां ज्यादा पानी पीना सूजन और अन्य दिक्कतें पैदा कर सकता है।
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60 साल के बाद आमतौर पर 1.5 से 2 लीटर पानी, पूरे दिन में छोटे-छोटे घूंट में लेना बेहतर माना जाता है। एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीना शरीर पर दबाव डाल सकता है।
इस उम्र में पेशाब का रंग, मुंह का सूखापन और थकान जैसे संकेतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।
क्या ज्यादा पानी पीना सच में नुकसानदायक हो सकता है?
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने से भी समस्या हो सकती है। अत्यधिक पानी पीने से शरीर में सोडियम का स्तर गिर सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है।
इसके लक्षणों में सिरदर्द, उलझन, मतली और गंभीर मामलों में बेहोशी तक शामिल हो सकती है। खासकर वे लोग जो बिना प्यास लगे सिर्फ “रूटीन पूरा करने” के लिए पानी पीते रहते हैं, उन्हें सावधान रहना चाहिए।
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पानी की कमी शरीर को कैसे संकेत देती है
शरीर पानी की कमी को कई तरीकों से बताता है, लेकिन हम अक्सर उन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। गहरा पीला पेशाब, बार-बार थकान, सिर भारी लगना, स्किन का रूखापन और कब्ज — ये सभी पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ ये संकेत और भी हल्के हो सकते हैं, इसलिए खुद से ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
सही पानी पीने का तरीका क्या है
सही मात्रा के साथ-साथ सही तरीका भी उतना ही जरूरी है। सुबह उठकर एक-दो गिलास पानी पीना शरीर को एक्टिव करता है। खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी पीने से बचना चाहिए।
दिनभर छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना, प्यास लगने से पहले थोड़ा पानी लेना और मौसम के हिसाब से मात्रा को एडजस्ट करना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
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क्या चाय-कॉफी पानी की जगह ले सकती है?
कई लोग यह मान लेते हैं कि चाय, कॉफी या जूस पीने से पानी की जरूरत पूरी हो जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि ये पेय पानी का पूरा विकल्प नहीं होते।
कैफीन वाले ड्रिंक्स शरीर से पानी बाहर निकाल सकते हैं, इसलिए इन्हें पानी की गिनती में पूरी तरह शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
हर उम्र के लिए एक ही नियम क्यों नहीं चलता
पानी पीने को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि एक ही नियम सब पर लागू नहीं होता। उम्र, जीवनशैली और स्वास्थ्य के अनुसार पानी की जरूरत बदलती रहती है।
जो व्यक्ति अपने शरीर के संकेतों को समझकर पानी पीता है, उसका शरीर लंबे समय तक संतुलित और स्वस्थ रहता है।





