डिलीवरी के बाद जब एक महिला खुद को शीशे में देखती है और उसका पेट पहले जैसा अंदर नहीं दिखता, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर इतनी डाइट, इतनी मेहनत और इतना त्याग करने के बाद भी पेट क्यों नहीं जा रहा। यह सवाल आज किसी एक महिला का नहीं है, बल्कि लाखों माताओं के मन में रोज उठने वाला सवाल है। समाज अक्सर इसे सामान्य कहकर टाल देता है, लेकिन सच्चाई यह है कि डिलीवरी के बाद पेट निकलना केवल शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के भीतर चल रही गंभीर प्रक्रियाओं का संकेत हो सकता है।
माँ बनने के बाद महिला का शरीर पूरी तरह बदल जाता है। नौ महीनों तक एक नया जीवन पालने वाला शरीर अचानक पहले जैसा हो जाए, यह उम्मीद ही अव्यावहारिक है। लेकिन जब कई महीने बीत जाते हैं, वजन भी काफी हद तक कम हो जाता है और फिर भी पेट बाहर ही रहता है, तब यह चिंता का विषय बन जाता है। धीरे-धीरे यह चिंता आत्मविश्वास को कमजोर करने लगती है और महिला खुद को ही दोष देने लगती है।
पेट की मांसपेशियां, जो चुपचाप कमजोर हो जाती हैं
डिलीवरी के बाद पेट न जाने की सबसे बड़ी और अनदेखी वजह पेट की मांसपेशियों का कमजोर हो जाना है। गर्भावस्था के दौरान पेट की मांसपेशियां काफी फैल जाती हैं ताकि बच्चे को पर्याप्त जगह मिल सके। कई महिलाओं में ये मांसपेशियां डिलीवरी के बाद ठीक से वापस नहीं जुड़ पातीं। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को डायस्टेसिस रेक्टाई कहा जाता है।
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इस समस्या में पेट की चर्बी कम भी हो जाए, तब भी पेट बाहर निकला हुआ दिखता है क्योंकि मांसपेशियां अंदर से सहारा नहीं दे पातीं। यही वजह है कि कुछ महिलाएं बहुत दुबली दिखती हैं, लेकिन पेट फिर भी उभरा रहता है। इसे समझे बिना सिर्फ वजन घटाने पर ध्यान देना समस्या को और बढ़ा देता है।
हार्मोनल असंतुलन, जो मेहनत पर पानी फेर देता है
डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में हार्मोन का संतुलन पूरी तरह बदल जाता है। एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और इंसुलिन जैसे हार्मोन धीरे-धीरे सामान्य होते हैं, लेकिन कई बार यह प्रक्रिया लंबी हो जाती है। अगर साथ में थायरॉइड या पीसीओडी जैसी समस्या हो, तो पेट की चर्बी सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।
कई महिलाएं सालों तक डाइट और वॉक करती रहती हैं, लेकिन हार्मोन की जांच करवाने का ख्याल तक नहीं आता। जब तक हार्मोन संतुलित नहीं होते, तब तक पेट की चर्बी जिद्दी बनी रहती है। यही कारण है कि कोशिशों के बावजूद नतीजे नजर नहीं आते।
नींद की कमी और बढ़ता तनाव, छुपा हुआ दुश्मन
नवजात शिशु की देखभाल में माँ की नींद पूरी नहीं हो पाती। लगातार टूटती नींद और शारीरिक थकान शरीर में कोर्टिसोल नाम के तनाव हार्मोन को बढ़ा देती है। यह हार्मोन पेट के आसपास चर्बी जमा करने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
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ऊपर से मानसिक दबाव, जिम्मेदारियां और खुद के लिए समय न मिल पाना समस्या को और गंभीर बना देता है। कई महिलाएं यह समझ ही नहीं पातीं कि उनका पेट बढ़ने की असली वजह खाना नहीं, बल्कि तनाव और नींद की कमी है।
पाचन की गड़बड़ी और पेट की सूजन
डिलीवरी के बाद कब्ज, गैस और अपच की समस्या बहुत आम हो जाती है। कमजोर पाचन तंत्र के कारण पेट में सूजन बनी रहती है, जिससे पेट हमेशा फूला हुआ नजर आता है। कई महिलाएं इसे मोटापा समझ लेती हैं, जबकि असल में यह पेट की सूजन होती है।
गलत समय पर खाना, पानी कम पीना और फाइबर की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है। जब तक पाचन ठीक नहीं होता, तब तक पेट अंदर जाने की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है।
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गलत एक्सरसाइज, सही इरादा लेकिन गलत तरीका
डिलीवरी के बाद जल्दी शेप में आने की चाह में कई महिलाएं बिना सही जानकारी के भारी एक्सरसाइज शुरू कर देती हैं। गलत समय पर या गलत तरीके से की गई एक्सरसाइज पेट की मांसपेशियों को और नुकसान पहुंचा सकती है। इससे पेट अंदर जाने की बजाय और बाहर निकल सकता है।
हर महिला का शरीर अलग होता है और डिलीवरी के बाद हर किसी के लिए एक जैसा व्यायाम सही नहीं होता। शरीर की स्थिति को समझे बिना किया गया अभ्यास फायदा कम और नुकसान ज्यादा करता है।
डाइटिंग की सबसे बड़ी भूल
डाइट के नाम पर खुद को भूखा रखना भी पेट कम न होने की एक बड़ी वजह है। जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो वह फैट को बचाने लगता है। खासकर पेट के आसपास की चर्बी शरीर के लिए सुरक्षा कवच बन जाती है।
जरूरत से ज्यादा कम खाना मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है, जिससे पेट की चर्बी और जिद्दी हो जाती है। सही मात्रा में संतुलित भोजन ही इस समस्या का असली समाधान है।
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सही दिशा में पहला कदम क्या हो
इस पूरी समस्या का समाधान जल्दबाजी में नहीं, बल्कि समझदारी में छुपा है। डिलीवरी के बाद कम से कम छह महीने तक शरीर को ठीक होने का समय देना बेहद जरूरी होता है। इस दौरान संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर के लिए सबसे बेहतर होती है।
योग और सांस से जुड़े अभ्यास पेट की गहरी मांसपेशियों को धीरे-धीरे मजबूत करने में मदद करते हैं। सही मार्गदर्शन में किए गए अभ्यास लंबे समय तक असर दिखाते हैं।
डॉक्टर से सलाह लेना कमजोरी नहीं
अगर डिलीवरी के काफी समय बाद भी पेट अंदर नहीं जा रहा, तो डॉक्टर से सलाह लेना बिल्कुल भी शर्म की बात नहीं है। कई बार छोटी सी जांच या सही मार्गदर्शन बड़ी समस्या को सुलझा देता है।
महिला का शरीर एक चमत्कार है, जिसने एक जीवन को जन्म दिया है। उसे समय, समझ और सम्मान की जरूरत होती है।
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अंत में सबसे जरूरी बात
डिलीवरी के बाद पेट निकलना किसी महिला की असफलता नहीं है। यह शरीर का संकेत है कि उसे देखभाल और सही दिशा की जरूरत है। समाज के दबाव में आकर खुद को दोष देने के बजाय अगर महिला अपने शरीर की बात सुने, तो यह समस्या धीरे-धीरे काबू में आ सकती है। माँ बनना गर्व की बात है और माँ का स्वस्थ रहना उससे भी ज्यादा जरूरी है।





