नई दिल्ली: कुदरत के करिश्मे भी बड़े अजीब होते हैं। कहीं हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ती है, तो कहीं रेगिस्तान की तपती रेत इंसान का इम्तिहान लेती है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दुनिया में एक ऐसी जगह भी है जहाँ सोने के लिए आपको अंधेरे का इंतज़ार नहीं करना पड़ता? जी हां, इस धरती पर एक ऐसा देश मौजूद है जहाँ रात सिर्फ नाम मात्र की होती है। यहाँ सूरज ढलता तो है, लेकिन सिर्फ 40 मिनट के लिए, और फिर से सवेरा हो जाता है।
यह सुनने में किसी परीकथा या फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। इस अद्भुत भौगोलिक घटना ने सदियों से वैज्ञानिकों और पर्यटकों को हैरान कर रखा है। आइए जानते हैं उस देश के बारे में और उस ‘जादुई’ विज्ञान के बारे में जो इस घटना के पीछे काम करता है।
नॉर्वे: ‘लैंड ऑफ मिडनाइट सन’ की हकीकत
हम जिस देश की बात कर रहे हैं उसका नाम है नॉर्वे (Norway)। यूरोप के इस खूबसूरत देश को ‘लैंड ऑफ मिडनाइट सन’ यानी ‘आधी रात के सूरज का देश’ कहा जाता है। नार्वे के उत्तरी हिस्से में स्थित हैमरफेस्ट (Hammerfest) नाम का शहर इस अनोखी घटना का मुख्य केंद्र है। यहाँ मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जुलाई के अंत तक सूरज पूरी तरह से कभी गायब नहीं होता।
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नॉर्वे में आधी रात को भी आसमान में सूरज की हल्की रोशनी बिखरी रहती है। यहाँ रात के करीब 12:40 पर सूरज डूबता है और महज 40 मिनट बाद, यानी करीब 1:20 पर फिर से नई किरणें बिखरने लगती हैं। लोग यहाँ घड़ी देखकर सोते हैं, क्योंकि रोशनी को देखकर समय का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है।
क्यों होती है सिर्फ 40 मिनट की रात?
अब सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि पृथ्वी का अपनी धुरी पर झुकाव और उसकी गति है। विज्ञान के अनुसार, पृथ्वी अपनी धुरी (Axis) पर सीधी नहीं है, बल्कि वह 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसके साथ ही पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है।
गर्मियों के दौरान (मई से जुलाई तक), पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव (North Pole) सूरज की तरफ झुका होता है। इस वजह से आर्कटिक सर्कल के ऊपर के क्षेत्रों में सूरज क्षितिज (Horizon) से नीचे नहीं जा पाता। नॉर्वे का उत्तरी हिस्सा इसी सर्कल में आता है, जिसके कारण वहां सूरज डूबने के बाद भी अंधेरा नहीं होता और कुछ ही मिनटों में वह फिर से ऊपर आ जाता है।
कैसे जीते हैं यहाँ के लोग?
एक ऐसी जगह जहाँ 24 घंटे रोशनी हो, वहां आम जनजीवन कैसा होता होगा? यह सोचना काफी रोचक है। यहाँ के लोग अपनी खिड़कियों पर बहुत भारी और मोटे पर्दे लगाते हैं ताकि कमरों में अंधेरा किया जा सके और वे सुकून की नींद ले सकें। यहाँ के बच्चे आधी रात को भी गलियों में फुटबॉल खेलते नजर आ जाते हैं, क्योंकि उन्हें रात का अहसास ही नहीं होता।
पर्यटन के लिहाज से नार्वे का यह समय सबसे व्यस्त होता है। दुनिया भर से लोग इस ’40 मिनट की रात’ का अनुभव करने यहाँ पहुँचते हैं। समुद्र के किनारे आधी रात को डूबते और तुरंत निकलते सूरज का नजारा देखना किसी दिव्य अनुभव से कम नहीं होता।
सिर्फ नार्वे ही नहीं, यहाँ भी होता है कुछ ऐसा ही
हालांकि नार्वे सबसे प्रसिद्ध है, लेकिन दुनिया के कुछ और भी हिस्से हैं जहाँ गर्मियों में सूरज बहुत देर तक चमकता है। अलास्का, कनाडा का कुछ हिस्सा, आइसलैंड और फिनलैंड में भी ‘मिडनाइट सन’ की घटनाएं होती हैं, लेकिन नॉर्वे जैसी ’40 मिनट की सटीक रात’ का जादू कहीं और इतना स्पष्ट नहीं दिखता।
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प्रकृति की यह विविधता हमें याद दिलाती है कि हमारी पृथ्वी कितनी अद्भुत है। “सोचविमर्श” आपको ऐसी ही रोचक जानकारियों से रूबरू कराता रहेगा। अगर आप भी रोमांच और विज्ञान के शौकीन हैं, तो नॉर्वे की यह यात्रा आपकी ‘बकेट लिस्ट’ में जरूर होनी चाहिए।





