लखनऊ। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की कमान संभालना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे अपने कड़े अनुशासन और अद्वितीय कार्यशैली से मुमकिन कर दिखाया है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर CM Adityanath Yogi daily routine क्या है? वह बिना थके, बिना किसी छुट्टी के लगातार 18-18 घंटे कैसे काम कर लेते हैं? आज हम मुख्यमंत्री योगी के उसी ‘नो-ब्रेक’ वर्किंग मॉडल और उनकी सात्विक जीवनशैली का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
ब्रह्म मुहूर्त में जागरण: दिन की शुरुआत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या सूरज उगने से बहुत पहले शुरू हो जाती है। वह ‘ब्रह्म मुहूर्त’ में यानी सुबह 3:00 से 4:00 बजे के बीच उठ जाते हैं। उठने के बाद उनका पहला काम योग और साधना होता है। एक संन्यासी होने के नाते, योग उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। करीब एक घंटे तक प्राणायाम और ध्यान करने के बाद वह अपनी धार्मिक क्रियाओं को पूरा करते हैं। यही वह समय है जब वह मानसिक रूप से पूरे दिन के बड़े फैसलों के लिए खुद को तैयार करते हैं।
गौ-सेवा और प्रकृति से जुड़ाव
योगी आदित्यनाथ जब गोरखपुर में होते हैं, तो उनकी सुबह की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर के गौशाला में गौ-सेवा से होती है। लखनऊ में भी वह अपने सरकारी आवास पर पशुओं और प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि बेजुबान जानवरों की सेवा से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। सुबह करीब 7:30 बजे तक वह तैयार होकर अपनी पहली सरकारी फाइल देखने के लिए मेज पर आ जाते हैं।
‘नो-ब्रेक’ वर्किंग मॉडल: 18 घंटे का कार्यदिवस
मुख्यमंत्री का वर्किंग स्टाइल किसी कॉर्पोरेट CEO से भी कहीं अधिक सख्त है। उनका ‘नो-ब्रेक’ मॉडल सुबह 9:00 बजे से पूरी रफ्तार पकड़ लेता है। उनके दिन की शुरुआत अक्सर महत्वपूर्ण बैठकों और अधिकारियों के साथ ब्रीफिंग से होती है।
- जनता दरबार: मुख्यमंत्री का प्रयास रहता है कि वह आम जनता की समस्याओं को सीधे सुनें। लखनऊ हो या गोरखपुर, उनका जनता दरबार उनकी प्राथमिकता में रहता है।
- सचिवालय (पंचम तल) की बैठकें: दोपहर में वह सचिवालय के पांचवें तल पर स्थित अपने कार्यालय पहुँचते हैं। यहाँ वह विभिन्न विभागों के मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के साथ बैक-टू-बैक मीटिंग करते हैं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह फाइलों को लंबित नहीं रखते; ‘ऑन द स्पॉट’ फैसले लेना उनकी पहचान है।
- फील्ड विजिट: मुख्यमंत्री केवल दफ्तर तक सीमित नहीं रहते। वह अक्सर जिलों के औचक निरीक्षण पर निकल जाते हैं, जिससे प्रशासनिक अमला हमेशा ‘अलर्ट मोड’ पर रहता है।
डाइट का राज: क्या खाते हैं मुख्यमंत्री?
उनकी असीमित ऊर्जा का एक बड़ा राज उनकी सात्विक डाइट है। योगी आदित्यनाथ बहुत ही हल्का और सुपाच्य भोजन करते हैं।
- नाश्ता: उनके नाश्ते में अक्सर दलिया, कुछ फल या उबले हुए चने शामिल होते हैं। वह चाय की जगह गुनगुना पानी या नींबू पानी को प्राथमिकता देते हैं।
- लंच और डिनर: दोपहर और रात के खाने में वह सादा भोजन (दाल, रोटी, और हरी सब्जियां) लेते हैं। वह मसालेदार और तैलीय भोजन से पूरी तरह परहेज करते हैं। रात का खाना वह अक्सर जल्दी (शाम 8 बजे तक) खा लेते हैं, ताकि पाचन सही रहे और नींद गहरी आए।
बिना छुट्टी का संकल्प: एक अनोखा रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री बनने के बाद से योगी आदित्यनाथ ने शायद ही कभी ‘पर्सनल लीव’ या लंबी छुट्टी ली हो। यहाँ तक कि त्योहारों के समय भी वह या तो ड्यूटी पर होते हैं या जनता के बीच। उनके करीबियों का कहना है कि उनके शब्दकोश में ‘थकान’ शब्द नहीं है। वह तकनीक का भरपूर उपयोग करते हैं, जिससे वह यात्रा के दौरान भी आईपैड (iPad) के जरिए सरकारी फाइलों और राज्य की कानून-व्यवस्था पर नज़र रख पाते हैं।
प्रशासन पर असर: ‘योगी मॉडल’ का अनुशासन
मुख्यमंत्री की इस कड़ी दिनचर्या का असर उत्तर प्रदेश के पूरे प्रशासनिक ढांचे पर पड़ा है। जब मुख्यमंत्री खुद सुबह 9 बजे दफ्तर में सक्रिय हो जाते हैं, तो अधिकारियों को भी समय का पाबंद होना पड़ता है। उनके ‘लेट नाइट’ समीक्षा बैठकों की वजह से अब जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस कप्तानों (SP) को भी देर रात तक सक्रिय रहना पड़ता है। यही वह अनुशासन है जिसे आज देश भर में ‘योगी मॉडल’ के रूप में सराहा जा रहा है।
निष्कर्ष:
CM Adityanath Yogi daily routine हमें सिखाती है कि यदि अनुशासन और संकल्प दृढ़ हो, तो दुनिया का सबसे कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। एक संन्यासी और एक प्रशासक के बीच का यह संतुलन ही उन्हें भीड़ से अलग करता है। उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर के पीछे उनके इसी 18 घंटे के अथक परिश्रम का योगदान है।





