नई दिल्ली: आज के समय में शुद्ध दूध और घी मिलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। त्योहारों का सीजन हो या सामान्य दिन, मुनाफाखोरों ने हमारी रसोई तक ‘धीमा जहर’ पहुँचाने का रास्ता खोज लिया है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा किए गए छापों में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बाजार में बिकने वाला दूध और घी न केवल मिलावटी है, बल्कि इसमें यूरिया, डिटर्जेंट और घटिया क्वालिटी के पाम ऑयल जैसे घातक रसायन पाए गए हैं।
अगर आप भी अपने बच्चों को ताकत के लिए दूध और सेहत के लिए घी खिला रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी थोड़ी सी लापरवाही परिवार को कैंसर, लिवर डैमेज और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकती है। अच्छी खबर यह है कि अब आपको शुद्धता जांचने के लिए किसी लैब जाने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे ही मात्र 2 सेकंड में दूध और घी के असली-नकली होने का पता लगा सकते हैं।
दूध में मिलावट: यूरिया और डिटर्जेंट का जानलेवा खेल
दूध को गाढ़ा दिखाने और उसे लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए मिलावटखोर इसमें डिटर्जेंट और यूरिया मिलाते हैं। इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ‘स्लिप टेस्ट’ (Slip Test) है। कांच या पत्थर की किसी चिकनी सतह पर दूध की एक बूंद टपकाएं। अगर बूंद धीरे-धीरे नीचे गिरे और पीछे एक सफेद निशान छोड़ जाए, तो दूध शुद्ध है। लेकिन अगर बूंद तेजी से बह जाए और कोई निशान न छोड़े, तो समझ जाइए कि उसमें पानी या सिंथेटिक रसायन मिले हैं।
इसके अलावा, दूध को हिलाकर देखें। यदि दूध में झाग बहुत ज्यादा बन रहा है और वह काफी देर तक बना रहता है, तो यह डिटर्जेंट की मिलावट का पक्का संकेत है। शुद्ध दूध में झाग बहुत कम और जल्दी खत्म होने वाला होता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऐसा दूध पीने से पेट में अल्सर और पाचन तंत्र की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
नकली घी की पहचान: 2 सेकंड वाला पाम टेस्ट
बाजार में असली देसी घी के नाम पर अक्सर वनस्पति तेल या जानवरों की चर्बी मिलाई जाती है। इसे जांचने का सबसे सरल तरीका है कि आप थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रखें। अगर घी हथेली की गर्माहट से तुरंत पिघलने लगे, तो वह शुद्ध देसी घी है। लेकिन अगर उसे पिघलने में समय लगे या वह हथेली पर चिपचिपा महसूस हो, तो समझ जाइए कि उसमें पाम ऑयल या डालडा मिलाया गया है।
एक और असरदार तरीका है ‘आयोडीन टेस्ट’। एक चम्मच पिघले हुए घी में दो बूंद आयोडीन का घोल मिलाएं। अगर घी का रंग नीला हो जाता है, तो इसका मतलब है कि इसमें उबले हुए आलू या शकरकंद जैसे स्टार्च की मिलावट की गई है। शुद्ध घी का रंग आयोडीन डालने पर नहीं बदलता है।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी: क्या न करें?
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता को सलाह दी है कि वे खुली जगहों या सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते दूध और घी के लालच में न आएं। अक्सर कम कीमत के चक्कर में हम अपनी सेहत से समझौता कर लेते हैं। हमेशा एगमार्क (Agmark) या FSSAI के लोगो वाले भरोसेमंद ब्रांड्स से ही खरीदारी करें। अगर आपको दूध या घी का स्वाद कड़वा, तीखा या साबुन जैसा महसूस हो, तो उसे तुरंत फेंक दें और संबंधित अधिकारी को इसकी शिकायत करें।
याद रखें, मिलावटखोरी केवल एक अपराध नहीं बल्कि यह मानवता के खिलाफ एक बड़ा खतरा है। “सोच विमर्श” का उद्देश्य आपको डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है। आपकी छोटी सी सतर्कता आपके परिवार को अस्पताल के चक्कर काटने से बचा सकती है। इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों के साथ शेयर करें ताकि मिलावटखोरों के इस काले धंधे पर लगाम लग सके।





