कल्पना कीजिए कि आपके फोन की घंटी बजती है, आप स्क्रीन देखते हैं तो आपके भाई या बेटे का नाम चमक रहा होता है। आप फोन उठाते हैं और दूसरी तरफ से वही जानी-पहचानी आवाज़ घबराहट में कहती है— “पापा, मेरा एक्सीडेंट हो गया है, मुझे तुरंत 50,000 रुपये चाहिए, मैं एक दोस्त का UPI नंबर भेज रहा हूँ।” आप बिना सोचे-समझे पैसे भेज देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह फोन आपके बेटे ने नहीं, बल्कि एक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) सॉफ्टवेयर ने किया था।
जी हां, यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 2026 की सबसे डरावनी हकीकत है। साइबर अपराधी अब ‘AI वॉइस क्लोनिंग’ (AI Voice Cloning) का इस्तेमाल करके मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर एक्सपर्ट्स ने इसे ‘साइलेंट किलर स्कैम’ करार दिया है।
सिर्फ 3 सेकंड की रिकॉर्डिंग और आपकी आवाज़ चोरी!
अब सवाल यह उठता है कि स्कैमर्स के पास आपके अपनों की आवाज़ पहुँचती कैसे है? इसका जवाब बहुत ही चौंकाने वाला है। अगर आपने सोशल मीडिया (Instagram, Facebook या YouTube) पर अपनी कोई वीडियो डाली है या किसी अनजान कॉल पर 3-5 सेकंड तक बात की है, तो अपराधी उस छोटी सी रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके आपकी हूबहू आवाज़ तैयार कर लेते हैं।
आज के दौर के एडवांस AI टूल्स आपकी आवाज़ की पिच, टोन और बोलने के अंदाज को इतनी बारीकी से पकड़ लेते हैं कि सगे रिश्तेदार भी धोखा खा जाते हैं। अपराधी इसी ‘क्लोन की हुई आवाज़’ का इस्तेमाल करके इमोशनल ब्लैकमेल करते हैं और पैसे ऐंठते हैं।
कैसे काम करता है ‘हेलो’ बोलते ही ठगी का खेल?
हाल ही में सामने आए मामलों में देखा गया है कि स्कैमर्स सबसे पहले आपको एक अनजान नंबर से फोन करते हैं। जैसे ही आप ‘हेलो’ बोलते हैं या कुछ सेकंड बात करते हैं, वे आपकी आवाज़ के सैंपल चुरा लेते हैं। इसके बाद वे आपके कॉन्टैक्ट्स या सोशल मीडिया प्रोफाइल से आपके परिवार की जानकारी निकालते हैं।
अगली बार जब वे आपके किसी परिजन को फोन करते हैं, तो वे आपकी क्लोन की हुई आवाज़ में बात करते हैं। चूंकि फोन पर आवाज़ बिल्कुल असली लगती है और कॉल करने वाला किसी इमरजेंसी (जैसे पुलिस केस, मेडिकल इमरजेंसी या किडनैपिंग) का हवाला देता है, इसलिए लोग बिना जांच-पड़ताल किए तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
मैकाफी (McAfee) की रिपोर्ट के डरावने आंकड़े
हालिया ‘स्टेट ऑफ द स्कैमीवर्स’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी तरह के AI स्कैम का सामना कर चुका है। सर्वे में शामिल 47% भारतीयों ने माना कि वे अपने करीबियों की आवाज़ पहचानने में धोखा खा गए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह ठगी अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे गांवों के बुजुर्गों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
इस नए जाल से अपने परिवार को कैसे बचाएं?
तकनीक जितनी एडवांस हो रही है, हमें उतना ही सतर्क रहने की जरूरत है। आपको कुछ ऐसे तरीके बताए गए हैं जो आपको और आपके परिवार को इस खतरे से बचा सकते हैं:
- फैमिली कोड वर्ड (Family Code Word) बनाएं: अपने परिवार के सदस्यों के साथ एक गुप्त ‘कोड वर्ड’ तय करें। अगर कभी कोई इमरजेंसी कॉल आए और सामने वाला पैसे मांगे, तो उससे वह गुप्त कोड पूछें। अगर वह न बता पाए, तो समझ जाइये कि वह स्कैमर है।
- सोशल मीडिया पर प्राइवेसी: अपनी वीडियो और ऑडियो क्लिप्स को पब्लिक न रखें। स्कैमर्स इन्हीं का इस्तेमाल आवाज़ चुराने के लिए करते हैं।
- अनजान कॉल्स पर चुप्पी साधे: अगर किसी अनजान नंबर से कॉल आए, तो बहुत ज्यादा न बोलें। अगर सामने वाला संदिग्ध लगे, तो तुरंत कॉल काट दें।
- वापस कॉल करें: अगर कोई करीबी इमरजेंसी की बात करे, तो तुरंत फोन काटकर उनके असली नंबर पर या किसी दूसरे घर वाले को कॉल करके सच्चाई का पता लगाएं।
ठगी हो जाए तो क्या करें?
अगर भगवान न करे आपके साथ ऐसा कोई हादसा हो जाए, तो घबराने की जगह तुरंत एक्शन लें। सरकार ने साइबर अपराधों की रिपोर्ट के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इसके अलावा आप CyberCrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। याद रखें, शुरुआती 1-2 घंटों (Golden Hours) में रिपोर्ट करने पर पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।





