भारतीय क्रिकेट हमेशा से नए टैलेंट की खान रहा है, लेकिन हाल ही में बिहार से आने वाले युवा क्रिकेटरों ने जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचाया है, उसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में बिहार टीम के दो युवा सितारे— वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) और आयुष आनंद लोहारुका (Ayush Anand Loharuka)—की जोड़ी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है।
इस धमाकेदार परफॉर्मेंस ने क्रिकेट के गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का अगला कप्तान बिहार जैसे राज्य से आ सकता है?
वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर वैभव सूर्यवंशी: नया ‘धमाका’
14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने जो किया, वह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हो चुका है। अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैच में उन्होंने मात्र 36 गेंदों में शतक जड़कर और 54 गेंदों में 150 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका के महान बल्लेबाज एबी डिविलियर्स का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनकी 190 रनों की पारी ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक चमत्कार नहीं, बल्कि एक परिपक्व खिलाड़ी हैं।
वैभव की निडर बल्लेबाज़ी और बड़े शॉट्स खेलने की क्षमता उन्हें एक स्वाभाविक लीडर बनाती है। उनमें दबाव में शांत रहकर मैच जिताने की काबिलियत साफ दिखती है।
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आयुष आनंद लोहारुका: शानदार ऑलराउंडर का उदय
वैभव का बेहतरीन साथ निभाने वाले आयुष आनंद लोहारुका भी इस मैच के हीरो रहे। उन्होंने 98 रनों की शानदार पारी खेली और वैभव के साथ मिलकर 300 रनों से ज्यादा की रिकॉर्ड तोड़ साझेदारी की। आयुष की सबसे बड़ी ताकत उनकी ऑलराउंड क्षमता है—वह बल्लेबाज़ी के साथ-साथ एक बेहतरीन स्पिनर भी हैं।
इस तरह की हरफनमौला प्रतिभा हमेशा टीम के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण होती है और अक्सर ऐसे खिलाड़ी भविष्य में कप्तानी की भूमिका में देखे जाते हैं।
बिहार में क्रिकेट का भविष्य और कप्तानी की उम्मीदें
बिहार क्रिकेट में प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही, लेकिन सुविधाओं की कमी अक्सर आड़े आती थी। अब चीजें बदल रही हैं।
- ईशान किशन का उदाहरण: भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन भी बिहार से ही आते हैं और आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
- नेतृत्व क्षमता: जिस तरह से वैभव और आयुष ने अपनी पारियों को संभाला, वह उनकी क्रिकेट समझ और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
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अगर इन दोनों युवा प्रतिभाओं को बीसीसीआई और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा सही मार्गदर्शन, विश्व स्तरीय कोचिंग और सुविधाएं मिलती हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब ये युवा खिलाड़ी सीनियर टीम इंडिया में शामिल होंगे और शायद कप्तानी की बागडोर भी संभालते नज़र आएंगे।
फिलहाल, वैभव और आयुष ने बिहार के क्रिकेट फैंस को खुश होने का एक बड़ा मौका दिया है और साबित कर दिया है कि बिहार भी भारतीय क्रिकेट टीम को भविष्य के कप्तान देने की क्षमता रखता है।





