अधिकतर लोग यह मान लेते हैं कि किडनी खराब होना अचानक होने वाली समस्या है, लेकिन सच्चाई यह है कि किडनी धीरे-धीरे और चुपचाप खराब होती है। शुरुआत में कोई तेज दर्द या बड़ा लक्षण नहीं दिखता, इसलिए व्यक्ति इसे सामान्य थकान या मामूली परेशानी समझकर टाल देता है। यही अनदेखी आगे चलकर बड़ी बीमारी का रूप ले लेती है।
किडनी का काम शरीर से गंदे पदार्थों को बाहर निकालना और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखना होता है। जब किडनी पर लगातार दबाव पड़ता रहता है, तो उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, लेकिन शरीर शुरू में साफ चेतावनी नहीं देता।
रोज की छोटी आदतें जो किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं
किडनी खराब होने की सबसे आम वजह रोज की वही आदतें होती हैं, जिन्हें हम सामान्य मान लेते हैं। बहुत कम पानी पीना, लंबे समय तक पेशाब रोकना और जरूरत से ज्यादा नमक खाना किडनी पर सीधा असर डालता है। शरीर में पानी की कमी होते ही किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
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इसके अलावा बिना जरूरत दर्द की दवाएं लेना भी किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। लोग सिरदर्द या बदन दर्द में दवा को हल्के में ले लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना किडनी को अंदर से कमजोर कर सकता है।
जब शरीर संकेत देता है, लेकिन हम समझ नहीं पाते
किडनी खराब होने की शुरुआत में शरीर हल्के संकेत देता है, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। बार-बार थकान महसूस होना, चेहरे या पैरों में हल्की सूजन, पेशाब में बदलाव या झाग दिखना — ये सब शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
कई बार व्यक्ति इन लक्षणों को उम्र, काम का तनाव या मौसम का असर समझ लेता है। यही वजह है कि किडनी की समस्या समय पर पकड़ में नहीं आती और बीमारी बढ़ती चली जाती है।
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गलत खान-पान कैसे बनता है बड़ा कारण
आज की जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड, पैकेट वाला खाना और ज्यादा नमक-शक्कर का सेवन आम हो गया है। ऐसा भोजन किडनी पर अतिरिक्त बोझ डालता है। खासकर ज्यादा नमक शरीर में पानी रोकने लगता है, जिससे किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
कम फल-सब्जियां खाना और फाइबर की कमी भी किडनी की सेहत पर असर डालती है। गलत खान-पान धीरे-धीरे किडनी की सफाई करने की क्षमता को कमजोर करता चला जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर और शुगर का छुपा खतरा
कई लोग यह नहीं जानते कि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली समस्याओं में शामिल हैं। अगर ब्लड प्रेशर या शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे, तो किडनी की छोटी रक्त नलिकाएं खराब होने लगती हैं।
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इस स्थिति में किडनी धीरे-धीरे अपना काम ठीक से नहीं कर पाती, लेकिन शुरुआत में कोई तेज लक्षण दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि नियमित जांच को लोग टालते रहते हैं।
नींद और तनाव का भी होता है असर
लगातार तनाव और पूरी नींद न लेना भी किडनी की सेहत को प्रभावित करता है। तनाव हार्मोन शरीर में सूजन और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, जो किडनी के लिए नुकसानदेह है।
नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है। जब यह प्रक्रिया ठीक से नहीं होती, तो अंदरूनी अंगों पर उसका असर दिखने लगता है, जिसमें किडनी भी शामिल है।
किडनी क्यों “साइलेंट ऑर्गन” कहलाती है
किडनी को अक्सर साइलेंट ऑर्गन कहा जाता है, क्योंकि यह तब तक तेज दर्द नहीं देती जब तक नुकसान काफी ज्यादा न हो जाए। यही वजह है कि लोग इसे हल्के में लेते हैं और समय रहते ध्यान नहीं देते।
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जब तक साफ लक्षण सामने आते हैं, तब तक किडनी का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो चुका होता है। इसी कारण जागरूकता और छोटी आदतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।
किडनी की सेहत को लेकर सोच बदलना जरूरी
किडनी खराब होना किसी एक दिन की गलती का नतीजा नहीं होता। यह रोज-रोज की अनदेखी और गलत आदतों का परिणाम होता है। शरीर जो हल्के संकेत देता है, वही सबसे अहम होते हैं।
जो लोग समय रहते इन संकेतों को समझ लेते हैं और अपनी दिनचर्या पर ध्यान देते हैं, उनकी किडनी लंबे समय तक बेहतर तरीके से काम करती रहती है।





