जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि थकान आना तो अब सामान्य बात है। “उम्र हो गई है” कहकर हम शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हर थकान सामान्य नहीं होती।
कुछ थकान उम्र का असर हो सकती है, लेकिन लगातार बनी रहने वाली थकान अक्सर शरीर के भीतर चल रही किसी समस्या की ओर इशारा करती है।
उम्र बढ़ने पर शरीर में क्या बदलता है
उम्र के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। मेटाबॉलिज्म की रफ्तार भी पहले जैसी तेज नहीं रहती। इस वजह से वही काम, जो पहले आसानी से हो जाता था, अब ज्यादा ऊर्जा मांगने लगता है और थकान जल्दी महसूस होती है।
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सामान्य थकान और संकेत वाली थकान में फर्क
अगर दिनभर के काम के बाद थकान आती है और आराम करने से ठीक हो जाती है, तो यह सामान्य है।
लेकिन अगर सुबह उठते ही थकान महसूस हो, तो यह संकेत हो सकता है।
लगातार थकान, बिना ज्यादा काम किए भी ऊर्जा की कमी महसूस होना, सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा नहीं माना जाता।
नींद और थकान का गहरा संबंध
उम्र बढ़ने के साथ नींद की गुणवत्ता बदलने लगती है। कई लोगों की नींद हल्की हो जाती है या बार-बार टूटती है। पूरी नींद न मिलने पर शरीर खुद को रिपेयर नहीं कर पाता, जिससे अगला दिन थकान से भरा रहता है।
क्या खान-पान थकान की वजह बन रहा है?
उम्र के साथ शरीर की पोषण जरूरतें भी बदल जाती हैं।
अगर खाना कम या असंतुलित हो, तो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। आयरन, विटामिन B12, प्रोटीन और पानी की कमी थकान का बड़ा कारण बन सकती है, जिसे अक्सर लोग पहचान नहीं पाते।
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मानसिक थकान को क्यों नजरअंदाज किया जाता है
थकान सिर्फ शरीर की नहीं होती, दिमाग भी थकता है।
लगातार तनाव, जिम्मेदारियां और सोच-विचार मानसिक ऊर्जा को खत्म कर देते हैं। मानसिक थकान धीरे-धीरे शारीरिक थकान में बदल जाती है और व्यक्ति हर समय भारीपन महसूस करने लगता है।
हार्मोनल बदलाव भी दे सकते हैं संकेत
उम्र बढ़ने पर हार्मोन का संतुलन बदलना सामान्य है, लेकिन ज्यादा असंतुलन समस्या बन सकता है। थायरॉइड जैसी स्थितियां थकान को बढ़ा सकती हैं। कई लोग सालों तक थकान झेलते रहते हैं और कभी जांच तक नहीं करवाते।
पानी कम पीना भी थकान की वजह
उम्र बढ़ने पर प्यास का एहसास कमजोर हो सकता है। इस वजह से लोग जरूरत से कम पानी पीते हैं।हल्का सा डिहाइड्रेशन भी शरीर को सुस्त बना देता है और थकान बढ़ा देता है।
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शारीरिक गतिविधि की कमी का असर
कम चलना-फिरना और लंबे समय तक बैठे रहना शरीर की ऊर्जा को और कम कर देता है।
हल्की-फुल्की गतिविधि भी अगर नियमित न हो, तो शरीर जल्दी थकने लगता है।
अजीब बात यह है कि बिल्कुल एक्टिव न रहना भी थकान को बढ़ाता है।
कब थकान को संकेत मानना चाहिए
अगर थकान हफ्तों तक बनी रहे और आराम से भी ठीक न हो।
अगर थकान के साथ चक्कर, सांस फूलना या कमजोरी महसूस हो। तो इसे उम्र का असर मानकर टालना सही नहीं होता।
शरीर क्या कहना चाहता है
थकान कई बार शरीर का तरीका होती है आपको रोकने का।
यह संकेत हो सकता है कि कुछ आदतें बदलने की जरूरत है। समय पर संकेत समझ लेने से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
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उम्र के साथ थकान को कैसे समझें
हर उम्र में थकान का मतलब अलग हो सकता है। जरूरी है कि शरीर के छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दिया जाए। जो लोग अपने शरीर को सुनते हैं, वे उम्र के साथ भी ज्यादा संतुलित महसूस करते हैं।





