महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने 5,757 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का भूमिपूजन किया। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने कुल 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले विकास कार्यों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से नासिक को एक प्रमुख तीर्थस्थल और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। फडणवीस ने कहा कि सभी कार्य पारदर्शी तरीके से किए जाएंगे और कुंभ मेला 12 साल में एक बार होने वाले इस पर्व के हिसाब से पूरी तैयारी के साथ आयोजित होगा।
आयोजन की अवधि और महत्व
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह कुंभ मेला विशेष रूप से ‘त्रिखंड योग’ के समय पड़ रहा है, जो 75 साल में एक बार आता है। इस बार मेला 28 महीने तक चलेगा, 31 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2028 तक आयोजित रहेगा। फडणवीस ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने मेला आयोजित करने के लिए अधिग्रहित होने वाली भूमि पर उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। इस आयोजन से न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर की सूरत में भी बदलाव आएगा और यह स्थल वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर अपनी पहचान बनाएगा।
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मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के कार्यक्रम
भूमिपूजन के बाद मुख्यमंत्री ने पंचवटी क्षेत्र में रामकुंड का दौरा किया और प्रस्तावित 99.14 करोड़ रुपये के रामकाल पथ के निर्माण की जानकारी ली। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेला सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि भारत की वैश्विक आध्यात्मिक छवि को भी मजबूत करेगा। इसके बाद फडणवीस और शिंदे ने भगवान कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना की।
अन्य घोषणाएँ और विकास कार्य
सीएम ने कहा कि राज्य में सबसे बड़े जिला परिषद भवन का उद्घाटन भी इसी कार्यक्रम के दौरान किया गया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मेले के लिए किए जाने वाले सभी कार्य कम से कम 25 वर्षों तक टिके रहें। साथ ही, मेला आयोजन के दौरान सुरक्षा और सुविधाओं के लिए कोई कमी नहीं होगी। इस अवसर पर पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित अन्य लोग भाजपा में शामिल हुए, जिससे राजनीतिक गतिविधियों की भी चर्चा रही।
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नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारी तेज गति से चल रही है। 5,757 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का भूमिपूजन और 20 हजार करोड़ रुपये की मंजूर कार्य योजना इस ऐतिहासिक मेले को सफल और सुचारु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह मेला न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।





