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बेंगलुरु में दर्दनाक वारदात: डॉक्टर ने पत्नी को एनेस्थीसिया देकर मार डाला, प्रोपोफोल से मौत की पुष्टि

On: October 18, 2025 6:06 PM
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बेंगलुरु में दर्दनाक वारदात: डॉक्टर ने पत्नी को एनेस्थीसिया देकर मार डाला, प्रोपोफोल से मौत की पुष्टि
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21–24 अप्रैल 2025 की तारीख में बेंगलुरु के मुन्नेकोल्ला इलाके में हुए घटनाक्रम के अनुसार 29 वर्षीय त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. कृतिका एम. रेड्डी अचानक बीमार पड़ीं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित किया गया। शुरुआती तौर पर मामला “प्राकृतिक मौत” जैसा दिखा, लेकिन बाद में फॉरेंसिक जांच में एनेस्थेसिया दवा के अंश मिलने और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उनके पति, सर्जन डॉ. महेंद्र रेड्डी जी.एस. को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया।

घटनाक्रम

21 अप्रैल 2025: रिपोर्टों के मुताबिक कृतिका ने पेट दर्द/गैस्ट्रिक शिकायत बतायी। उसी दिन उनके पति ने घरेलू तौर पर उन्हें इलाज दिया। आरोप है कि पैर में कैनुला लगाया गया और इंजेक्शन दिए गए।

23 अप्रैल: परिवार जनों के साथ रहने के बाद उनकी स्थिति बिगड़ी; कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि उस रात आखिरी डोज दी गई।

24 अप्रैल 2025 (सुबह): कृतिका को बेहोश पाया गया और नज़दीकी अस्पताल ले जाने पर ‘brought dead’ घोषित कर दिया गया। उस समय मामले को नैचुरल डेथ समझा गया।

अक्टूबर 2025: फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में उनके शरीर में प्रोपोफोल के निशान मिले और अन्य साक्ष्य (कैनुला/इंजेक्शन संबंधी उपकरण) के आधार पर केस फिर से खोला गया; इसके बाद पुलिस ने महेंद्र को गिरफ्तार किया।

मुख्य साक्ष्य — पुलिस और फॉरेंसिक क्या कहती हैं

जांच में पुलिस और SOCO (सीन ऑफ क्राइम) टीम को घटनास्थल और मेडिकल रिपोर्टों से कुछ ठोस साक्ष्य मिले, जिनकी वजह से संदेह गहरा हुआ: कैनुला सेट, इंजेक्शन ट्यूब जैसे उपकरण बरामद हुए; फॉरेंसिक (FSL) परीक्षण में कृतिका के शरीर में प्रोपोफोल/एनेस्थेटिक के अंश पाए गए

प्रोपोफोल क्या है और क्यों अहम है: प्रोपोफोल एक तीव्र प्रभाव वाला इंट्रावेनस एनेस्थेटिक (बेहोश करने वाली दवा) है, जिसका उपयोग सामान्यतः ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी या आईसीयू में किया जाता है। इससे सांस और रक्तचाप धीरे-धीरे डूब सकते हैं; गलत डोज या ओवरडोज से व्यक्ति की जान जा सकती है। FSL में इसका पाया जाना इसलिए चिन्ताजनक रहा कि यह दवा सामान्य घरेलू इलाज में उपयोग के लिये नहीं दी जाती।परिवार का दावा और मीडिया रिपोर्ट)

परिवार का दावा और मीडिया रिपोर्ट

कृतिका के परिजनों ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद से पति की मांगें और वैवाहिक तनाव चले आ रहे थे। परिवार का आरोप है कि महेंद्र ने निजी अस्पताल खोलने के लिए पैसों की मांग की और वे संतुष्ट नहीं थे; साथ ही परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के विवाहेतर संबंध रहे और वह अपनी पत्नी को मानसिक रूप से परेशान करते थे। इन पारिवारिक दावों को पुलिस ने जांच के हिस्से के रूप में लिया और यह संभावित मोटिव के तौर पर सूचीबद्ध हैं। पर ये सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अदालत/आधिकारिक रिकॉर्ड के बिना इन्हें निर्णायक सत्य नहीं कहा जा सकता।

बेंगलुरु में दर्दनाक वारदात: डॉक्टर ने पत्नी को एनेस्थीसिया देकर मार डाला, प्रोपोफोल से मौत की पुष्टि
कृतिका और महेंद्र की शादी 26 मई 2024 में हुई थीं। Image source: Instagram

गिरफ्तारी और पूछताछ की स्थिति

प्रारम्भिक रिपोर्टों के अनुसार बेंगलुरु पुलिस ने अक्टूबर 2025 में महेंद्र को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि आरोपी से जुड़े कुछ पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और परीक्षाओं की पड़ताल भी की जा रही है। गिरफ्तार किए जाने के बाद आरोपी पूछताछ के लिए रिमांड पर रखा गया है और पुलिस नया सबूत जुटा रही है—जैसे अस्पताल के रिकॉर्ड, दवाओं की उपलब्धता, वैवाहिक विवाद के संदर्भ, और किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका (कहा जा रहा है कि तलाशी में एक अन्य महिला का भी नाम सामने आ रहा है)। अभियोजन पक्ष और पुलिस अब केस के तार जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि चार्जशीट दायर की जा सके।

परिवार की भूमिका — बहन की जिद और फिर जांच

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि कृतिका की बहन डॉ. निकिता ने शुरुआत में “नेचुरल डेथ” से संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने सख्ती से फॉरेंसिक जांच की मांग की। यही जिद अंततः FSL जांच और रिपोर्ट के चलते केस खोलने में निर्णायक बनी। परिवार ने पोस्टमॉर्टम कराने, विसरा सैंपल भेजने और साक्ष्य जुटाने में लगातार दबाव डाला — और इससे केस के सच्चे पहलू सामने आए।

कैसे प्रोपोफोल जानलेवा हो सकता है

प्रोपोफोल के इस्तेमाल में रोगी का मॉनिटरिंग (नाड़ी, रक्तचाप, ऑक्सीजन) आवश्यक होता है। यह दवा विशेषज्ञों द्वारा नियंत्रित वातावरण (ऑपरेटिंग थियेटर / आईसीयू) में दी जाती है; घर पर या असुरक्षित तरीके से लगातार दिया जाना अत्यन्त खतरनाक होता है। एफएसएल रिपोर्ट में प्रोपोफोल के निशान और शरीर में उसकी मात्रा के आधार पर विशेषज्ञों ने कहा कि ओवरडोज से श्वसनना (respiratory depression) और कार्डियोवैस्कुलर फेलियर हो सकता है — यही कारण हुआ जिसकी वजह से प्रामाणिक रिपोर्टों के बाद पुलिस कार्रवाई हुई।

यह भी पढ़ें: भारत का पासपोर्ट हुआ और ताक़तवर, अब 59 देश बिना वीज़ा के घूम सकते हैं

क्या मामला “पर्फेक्ट क्राइम” था और कैसे पकड़ा गया?

प्रारम्भिक रूप से हत्या को एक समय नेचुरल मौत दिखाने की कोशिश की गई — पर SOCO टीम द्वारा मौके से बरामद उपकरण, FSL रिपोर्ट और परिवार की सतत जाँच की मांग ने मामले को अलग मोड़ दे दिया। रिपोर्टों के मुताबिक नाजुक तरीके से कैनुला सेट/ड्रिप लगाकर दवा दी गई और आरोप है कि आरोपी ने पोस्टमॉर्टम को रोकने की कोशिश भी की — ये सभी पलों ने घटनाक्रम पर शक जताया और केस खोलने का आधार बने। पुलिस ने कहा कि झूठ और छल लम्बे समय तक छिपे नहीं रहते।

सामाजिक-नैतिक असर और चिकित्सा पेशे पर सवाल

यह मामला इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह दर्शाता है कि चिकित्सा ज्ञान जब गलत इरादों के साथ प्रयोग हो, तो समाज के लिये कितना खतरनाक बन सकता है। मरीजों और परिजनों का भरोसा कलपित हो सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर समुदाय में भी आत्म-परीक्षण की आवाजें उठी हैं कि दवाओं और नियंत्रित पदार्थों की उपलब्धता व उनके रिकॉर्डिंग पर सख्ती होनी चाहिए। मीडिया में भी बात हुई कि अस्पतालों में दवा की खरीद-फरोख्त और उपयोग को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है।

अभी क्या स्थिति है — अगले कदम क्या होंगे

पुलिस की आगे की जांच में अस्पताल के रिकॉर्ड, दवाओं की सप्लाई रेकॉर्ड, आरोपी के फोन-मैसेजेस, और किसी अन्य संदिग्ध की भूमिका पर ध्यान रहेगा।

जब पुलिस या जांच टीम के पास सारे ज़रूरी सबूत इकट्ठे हो जाएंगे, तब वे अदालत में चार्जशीट जमा करेंगी। उसके बाद ही कोर्ट में मुकदमे की कार्यवाही यानी असली कानूनी लड़ाई शुरू होगी।

परिवार ने कहा है कि वे न्याय चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि आरोपी को सक्त सजा दी जाए; दूसरी तरफ़ आरोपी की तरफ़ से कानूनी बचाव सामने आएगा — यह सब न्यायालय तय करेगा।

यह मामला बहुत दुखद और उलझा हुआ है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि रिश्तों, पैसों और भरोसे के बीच टकराव कितना खतरनाक हो सकता है। अब ज़रूरी है कि जांच ईमानदारी और तेजी से हो, ताकि असली गुनहगार को सज़ा मिले और परिवार को न्याय मिले।
फिलहाल जो बातें सामने आई हैं, वे मीडिया रिपोर्ट और पुलिस की जानकारी पर आधारित हैं। आगे जो भी नतीजा जांच और अदालत से आएगा, वही सच्चाई मानी जाएगी।

Featured Image Source: Instagram

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