बेरोज़गारी ने बना दिया फ्रॉडस्टर!
जापान से एक चौंकाने वाली खबर आई है — एक बेरोज़गार शख्स ने फूड डिलीवरी ऐप को 2 साल तक धोखा दिया और करीब ₹21 लाख का खाना मुफ्त में खा गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 124 फर्जी अकाउंट्स बनाए और हर बार “ऑर्डर नहीं मिला” कहकर कंपनी से पैसे वापस लेता रहा।
कैसे चला दो साल तक फ्री खाना प्लान
शख्स ने बेरोज़गारी के दौरान अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए यह चाल चली थी।
वह अलग-अलग नाम, ईमेल और मोबाइल नंबर से अकाउंट बनाता था।
हर ऑर्डर के बाद शिकायत करता — “मुझे खाना नहीं मिला”, और कंपनी बिना सवाल पूछे रिफंड दे देती थी।
शख्स ने ऐप की गलती पकड़ ली और दो साल तक बिना पैसे दिए 2 साल तक खाना मंगवाता रहा।
हाल ही में ऐप की सिक्योरिटी टीम को रिफंड रिकॉर्ड्स में कुछ अजीब पैटर्न मिले। जांच में पता चला कि कई ऑर्डर एक ही लोकेशन से किए गए थे, लेकिन नाम और ईमेल अलग-अलग थे। कंपनी ने यह जानकारी पुलिस को दी। जब जांच की गई तो सामने आया कि सारे पैसे एक ही बैंक खाते में जा रहे थे।
इसके बाद पुलिस ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस पूछताछ में क्या बोला आरोपी
पूछताछ में शख्स ने बताया —
”मैं बेरोज़गार था और पैसे नहीं थे। शुरुआत में बस एक बार ट्राई किया, लेकिन जब देखा कि सिस्टम मुझे रोक नहीं रहा, तो करता रहा।”
पुलिस के अनुसार, उसने पिछले दो सालों में करीब ₹21 लाख के बराबर खाना मुफ्त में मंगाया था।
कंपनी का बयान
फूड डिलीवरी कंपनी ने कहा कि,
“हम ग्राहक अनुभव को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि सुरक्षा कितनी ज़रूरी है।”
कंपनी ने अब सभी यूज़र्स के लिए नई “ऑर्डर वेरिफिकेशन पॉलिसी” लागू की है, ताकि भविष्य में ऐसे धोखाधड़ी न हों।
विशेषज्ञों की राय
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल ठगी नहीं, बल्कि सिस्टम में भरोसे की कमजोरी का उदाहरण है।
अगर बेरोज़गारी जैसी समस्याएँ समय पर सुलझाई जातीं, तो शायद यह आदमी अपराध की राह पर नहीं जाता।
लेकिन कानून के हिसाब से —
“आर्थिक तंगी किसी अपराध का बहाना नहीं बन सकती।”
यह घटना बताती है कि डिजिटल युग में जहां सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है, वहीं ईमानदारी और टेक्नोलॉजी दोनों की सुरक्षा जरूरी है। बेरोज़गारी एक सामाजिक समस्या है, लेकिन उसका हल अपराध नहीं। शख्स गिरफ्तार हो चुका है, और अब जापान में यह चर्चा का बड़ा विषय बन गया है कि कैसे एक बेरोज़गार ने सिस्टम को दो साल तक बेवकूफ बनाया।





